धंधा है-पर गंदा है – कमेला बंदीं से किसका फायदा?

निगम का करोड़ों मे नुकसान और हजारों बेरोजगार

सहारनपुर नगर निगम का कमेला बंद होने से जहां नगर निगम को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है, वही इस कारोबार से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार भी हो गए हैं और शहर वासियों को महंगा मीट खरीदना पड़ रहा है।

 

निगम का कमेला क्यों बंद है और किसका फायदा है, इसको लेकर पिछले काफी समय से चर्चाये हवा में तैर रही थी, इस बार निगम के बजट स्तर के दौरान सपा नेता और पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने एक मीट कारोंबारी पर सीधे उंगली उठाकर कमेला बंदी के नुकसान और फायदे गिनाते हुए कमेला बंद कराने का दोषी बताया और नगर निगम की कार्य प्रणाली पर भी सवाल उठाये। जिससे कमेला बंद होने से बेरोजगार हुये लोगो के मन में जल रही चिंगारी को भी हवा मिल गई। बजट सत्र के दौरान टिंकू अरोड़ा द्वारा कमेला बंद होने को लेकर उठाए गए सवालों का अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है, लेकिन यह स्पष्ट है कि कमेला बंदी से निगम को भारी नुकसान हो रहा है और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

 

जनपद में नगर निगम के कमेले के साथ गंगोह और देवबंद सहित अधिकतर कमेले पर प्रदूषण विभाग द्वारा रोक लगाई गई है। जिससे इस कारोबार से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं साथ ही सरकार को मिलने वाला करोड़ों रुपए का राजस्व भी बंद हो गया है। कमेले बंद कराने की राजनीति के पीछे जनपद की मीट फैक्ट्री संचालकों पर उंगलिया उठती रहती है, क्योंकि हजारों लोगो की बेरोजगारी और सरकार के नुकसान को नजअंदाज करें तो कमेले बंद होने से सीधा मीट फैक्ट्री संचालको को सबसे अधिक मुनाफा होता है।

 

यही कारण है कि लगातार फैक्ट्री के कारिंदे छोटे-छोटे कटान से लेकर पुलिस को सूचना देते है और पशुओं की गाड़ियों के साथ मीट की गाड़ियों को भी पकड़वाने काम करते है, यह कहना है मीट कारोबार से जुड़े ढोली खाल और कमेला कॉलोनी के लोगो का, उनका कहना है कि यही बड़ा मीट कारोबारी अपने फायदे के लिए हजार लोगों के कारोबार को तबाह करने के साथ ही उनके बच्चों को भुखमरी के कगार पर ले आया है। इस सब के बीच नगर निगम में बजट सत्र के दौरान समाजवादी पार्टी के विधानसभा प्रभारी और पार्षद अभिषेक टिंकू अरोड़ा ने जब इस मुद्दे को उठाकर नगर निगम के संबंधित अधिकारियोंसे से सवाल पूछा तो किसी के पास कोई जवाब नहीं था, तब टिंकू को कहना पड़ा की निगम के अधिकारी बड़े मीट कारोंबारी के इशारे पर काम कर रहा हैं, जिससे निगम को करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान तो हो ही रहा है, वही निगम के हजारों लोग भी बेरोजगार हो गए हैं।

 

कारोबार को लेकर चलने वाली खींचतान कोई नई बात नहीं है, यह एक प्रतिस्पर्धा है, हर एक क्षेत्र में होती है, लेकिन हजारों लोगों का रोजगार छीन लेना सिर्फ चंद पैसों के लिए यह कहां तक जायज है, इसको लेकर एक बार फिर शहर में चर्चाएं शुरू हो गई है। ढोली खाल और कमेला कॉलोनी के हजारों लोग बेरोजगार होने का रोना रों रहे हैं। वही अधिकतर लोग अवैध क टान में जेल चले गए हैं, कुछ लोग पुलिस से छिपते हुए घूम रहे हैं कुछ लोग कोर्ट कोरियो के चक्कर काट रहे हैं। नगर निगम में करोड़ों रुपए जमा करने के बाद भी कमेला खुलवाते की आस लगाए बैठे हुये हैं।

Similar Posts