सहारनपुर। अगर आप भी कोई बड़ा ख्वाब लिए हुए आईएएस आईपीएस की तैयारी कर रहे हो, ती उपजिलाधिकारी संगीत राघव की कहानी पढ़ना न भूले. कुछ कर जाने का जोश, जुनून और जज्बा के रूप में महिलाओं के लिए इस उपजिलाधिकारी की सफल कहानी किसी टॉनिक से कम नहीं है। वर्ल्ड बैंक की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर कुछ बड़ा करने का सपना लिए हुए संगीत राघव ने अपने जीवन को पूरी तरह से परिवर्तित किया, लेकिन वो कहते हैं न कि पूरे मन से किया गया कार्य सफलता के मार्ग को बड़े ही शानदार तरीके से मजबूत बना देती है।
संगीता राघव महिलाओं के लिए बेहतरीन मिसाल है, उन्होंने वर्ल्ड बैंक में काम करने से लेकर सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट बनने तक का उल्लेखनीय सफर तय किया है, दरअसल, सिविल सेवा परीक्षा बेहद चुनौतीपूर्ण होती है, फिर भी कई उम्मीदवार समर्पण और प्रभावी स्टडी तकनीकों के माध्यम से सफलता हासिल करते है, संघर्ष और मेहनत के बल पर सफलता पाने की मिसाल है जनपद सहारनपुर की तहसील नकुड़ की उपजिलाधिकारी संगीता राघव, जिन्होंने बचपन में पढ़ाई में कमजोर होने के बावजूद अपने आत्मसंघर्ष और कड़ी मेहनत से उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा में प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया। उनकी यह उपलब्धि साबित करती है कि संकल्प और समर्पण के साथ कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
बचपन की चुनौतियों और कठिनाइयों संगीता राघव का जन्म एक सैन्य परिवार में हुआ। उनके पित्ता दिनेश सिंह राघव, भारतीय नौसेना में कार्यरत थे और 2002 में सेवानिवृत्त हुए। संगीता की प्रारंभिक शिक्षा मुंबई में हुई, लेकिन वह पढ़ाई में कमजोर थीं। कई स्कूलों ने उन्हें दाखिला देने से मना कर दिया था, क्योंकि उनकी अकादमिक प्रदर्शन संतोषजनक नहीं थी। उनके पिताजी ने पढ़ाई पर ध्यान देना शुरू किया, लेकिन संगीता का झुकाव खेलकूद की ओर अधिक था। वह थ्रोबॉल में नेशनल और वॉलीबॉल में स्टेट लेवल तक खेल चुकी हैं। हालांकि, एक दुर्घटना के कारण उन्हें शारीरिक रूप से कठिनाइयों झेलनी पड़ीं, जिससे उनका खेलकूद करियर आगे नहीं बढ़ सका। परिवर्तन का दौर और आत्मनिर्णय कक्षा 7 तक पढ़ाई में संघर्ष करने के बाद, संगीता ने अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें दूर करने की ठानी। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को अध्ययन में पूरी तरह झोंक दिया।
दसवीं और बारहवीं में बेहतरीन अंक प्राप्त करने के बाद, उन्होंने ग्रेजुएशन के दौरान शिक्षा के महत्व को गहराई से समझा। उनकी प्रोफेसर अनुपमा यादव ने संगीता के जीवन को एक नया मोड़ दिया, जब उन्होंने अपनी बेटी के जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) में पढ़ने की बात साझा की। यह सुनकर संगीता को प्रेरणा मिली और उन्होंने उच्च शिक्षा एवं प्रशासनिक सेवाओं की ओर अपने कदम बढ़ाए। कड़ी मेहनत से मिली ऐतिहासिक सफलता संगीता राघब ने दिन-रात कठिन परिश्रम करके 2020 की उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा में प्रदेश में दूसरा स्थान प्राप्त किया और नकुड़ उपजिलाधिकारी के रूप में नियुक्त हुई। आज वह अपने सख्त प्रशासनिक फैसलों और आम जनता के प्रति समर्पण के लिए जानी जाती है। वह विवादों को सुलझाने के लिए मौके पर पहुंचकर निष्पक्ष निर्णय लेने में विश्वास रखती हैं और जनता के हित में त्वरित कार्रवाई करती हैं। प्रेरणा देने वाली कहानी संगीता राघव का जीवन उन सभी युवाओं व महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो अपनी कमियों को अपनी सफलता के रास्ते में बाधा मानते हैं।
उनका कहना है कि कठिन मेहनत, सही दिशा और आत्मविश्वास से हर लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। संघर्ष ही सफलता की असली कुंजी
● उपजिलाधिकारी माराय की प्रेरणादायक कहानी…
गुरुग्राम से की पढ़ाई
संगीता राधव हरियाणा के गुरुग्राम की रहने वाली हैं। उनके पिता रिटायर्ड भारतीय नौसेना अधिकारी हैं और उनकी मां गृहिणी है। संगीता ने अपनी स्कूली शिक्षा और अंडरग्रेजुएट की पढ़ाई गुरुग्राम से की है। इसके बाद इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई की है।






